jaati nahin hai dil se kyun aarzoo tumhaari | जाती नहीं है दिल से क्यूँँ आरज़ू तुम्हारी

  - Sagar Sahab Badayuni
जातीनहींहैदिलसेक्यूँँआरज़ूतुम्हारी
कबतकरहेगीज़ारीयेजुस्तजूतुम्हारी
यकदमसेतुमकोदेखावोयादगईफिर
इकथीअज़ीज़लड़कीजोहू-ब-हूतुम्हारी
पागलकहेदुनियातोक्याबुलाएहमको
पत्थरसेकररहेहैंहमगुफ़्तगूतुम्हारी
चिथड़ेयेदिलकेतुमसेेसिलनेनहींरफ़ूगर
इकदिनटिकसकेगीदिलपेरफ़ूतुम्हारी
होजाएख़त्मक़िस्सादीदारहोतुम्हारा
कबतकरहेंभटकतेहमकू-ब-कूतुम्हारी
  - Sagar Sahab Badayuni
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