इतने भी ग़म नहीं थे दिल-ए-दाग़दार में

  - Sagar Sahab Badayuni
इतनेभीग़मनहींथेदिल-ए-दाग़दारमें
जितनेलगादिएहैंमुझेएकबारमें
ना-चीज़कोज़रासीतवज्जोहतोदीजिए
ग़ज़लेंकभीकभीतोलिखीहैंबुखारमें
झूठीख़बरथीमौतकीपरकामकरगई
छपवारहेहैंअपनेसभीइश्तिहारमें
दाढ़ीसफ़ेदबालबड़ेआँखलालहै
क्याहालहोगयाहैतिरेइंतिज़ारमें
आनेकोलौटनेकावोअबमननहींरहा
तुझ
मेंभीदमरहातिरीइसपुकारमें
किसबातकीसफ़ाईमुझेदेरहीहोतुम
कहदोनहींथेकलकिसीकेसाथकारमें
  - Sagar Sahab Badayuni
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