har shaKHs mirii baat se anjaan bahut hai | हर शख़्स मिरी बात से अंजान बहुत है

  - Sagar Sahab Badayuni
हरशख़्समिरीबातसेअंजानबहुतहै
इसबारमिटानेकोयेतूफ़ानबहुतहै
हमजैसेपरिंदोंकोमुयस्सरहुआघर
हमजैसेपरिंदोंकोयेज़िंदानबहुतहै
दोरातसेसोयाहीनहींहूँकेमैंदरपेश
किसकोमैंकहूँदिलयेपरेशानबहुतहै
चौतीसकीयेउम्रबहत्तरकीलगेहै
कितनेमैंकहूँइश्क़केनुक़सानबहुतहै
हरबारमुझेमौतसेलाताहैबचाकर
शीशेमेंखड़ेशख़्सकाएहसानबहुतहै
  - Sagar Sahab Badayuni
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