haqeeqat ko chhupaana chahta hooñ | हक़ीक़त को छुपाना चाहता हूँ

  - Sagar Sahab Badayuni
हक़ीक़तकोछुपानाचाहताहूँ
मैंसचमेंमुस्कुरानाचाहताहूँ
सभीकादुखसुनाईदेगाजिस
में
मैंऐसीधुनबनानाचाहताहूँ
उदासीसेयेदिलउकताचुकाहै
मैंअबदुनियासेजानाचाहताहूँ
तुम्हेंहरबातकहकरझूटअपनी
मैंसारासचबतानाचाहताहूँ
मुझेतुमआजमरकरकेदिखाओ
मैंतुमकोआज़मानाचाहताहूँ
ग़ज़लकेचारमिसरेबचगएहैं
मैंउनकोगुनगुनानाचाहताहूँ
  - Sagar Sahab Badayuni
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