din nahin kat rahe the ek to dushwaari men | दिन नहीं कट रहे थे एक तो दुश्वारी में

  - Sagar Sahab Badayuni
दिननहींकटरहेथेएकतोदुश्वारीमें
उसकीतस्वीरनज़रगईअलमारीमें
ख़ूब-सूरततोबलाकीहुआकरतीथीवो
अबनहींआतीनज़रबातवोबेचारीमें
इससेेपहलेकिलेजाएउसेकोईकहदे
ट्रेनअक्सरहीनिकलजातीहैतय्यारीमें
हमभीआएथेनएशहरमेंसपनेलेकर
परकतरडालेगएसारेवफ़ादारीमें
अदाकारनिकलअपनीअदाकारीसे
इतनेपैसेभीनहींमिलतेअदाकारीमें
तुमनेकुछदिनहीगुज़ारेहैंअभीकमरेमें
मैंनेदससालमिरेकाटेहैंदीवारीमें
मुझकोकाँधेपेउठाओमिरेघरवालों
इसतरहबातनहींकरतेहैंबीमारीमें
  - Sagar Sahab Badayuni
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy