ham ne khaak-e-dar-e-mahboob jo chehre pe malee | हम ने ख़ाक-ए-दर-ए-महबूब जो चेहरे पे मली

  - Saba Jayasi
हमनेख़ाक-ए-दर-ए-महबूबजोचेहरेपेमली
क़िस्सा-ए-दर्दछिड़ाबातसेफिरबातचली
किसतरहसमझूँमिराइश्क़हैसरगर्म-ए-सफ़र
राहबेदारहुईहैकहींशम्अ'जली
दिलकोबहलाएँकिक़दमोंकोसँभालेंहमलोग
जबनएमोड़पेपहुँचेहैंतोयेशामढली
येमिरेनक़्श-ए-क़दमवक़्तसेमिटसकतेहैं
अपनेसीनेसेलगाएहैजिन्हेंतेरीगली
हमनेहरतार-ए-गरेबाँकोबनायादामन
तेरीयादोंकोलिएबाद-ए-बहारीजोचली
मुझकोइसबर्क़सेबसइतनाहीशिकवाहै'सबा'
आशियाँजलगयाक्यूँँशाख़-ए-नशेमनजली
  - Saba Jayasi
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