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Saarthi Baidyanath
main kisi ko mil na paounga kahii par
main kisi ko mil na paounga kahii par | मैं किसी को मिल न पाउँगा कहीं पर
- Saarthi Baidyanath
मैं
किसी
को
मिल
न
पाउँगा
कहीं
पर
धूप
बनकर
फैल
जाउँगा
ज़मीं
पर
- Saarthi Baidyanath
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अब
की
सर्दी
में
कहाँ
है
वो
अलाव
सीना
अब
की
सर्दी
में
मुझे
ख़ुद
को
जलाना
होगा
Naeem Sarmad
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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मुझपे
पड़ती
नहीं
बलाओं
की
धूप
सर
पे
साया-फ़िगन
है
माँ
की
दु'आ
Amaan Haider
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पास
हमारे
आकर
वो
शर्माती
है
तब
जाकर
के
एक
ग़ज़ल
हो
पाती
है
उसको
छूना
छोटा
मोटा
खेल
नहीं
गर्मी
क्या
सर्दी
में
लू
लग
जाती
है
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Tanoj Dadhich
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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इंतिज़ार
इंतिज़ार
है
तो
है
एतिबार
एतिबार
है
तो
है
छोड़
कर
मुझको
सिर्फ़
इक
वो
चाँद
हिज़्र
का
राज़दार
है
तो
है
बावला
दिल
मेरी
तो
सुनता
नहीं
आपका
इख़्तियार
है
तो
है
मैं
हूँ
नादाँ
अगर
तो
हूँ
तो
हूँ
वो
अगर
होशियार
है
तो
है
दीद
का
लुत्फ़
हो
गया
हासिल
अब
नज़र
कर्ज़दार
है
तो
है
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Saarthi Baidyanath
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मयकशी
छोड़
भी
दूँ
लेकिन
मैं
आशिक़ी
कैसे
छोड़
सकता
हूँ
Saarthi Baidyanath
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मेरे
ऊपर
कहानी
लिख
रहे
हो
तो
पहले
जान
तो
लो
कौन
हूँ
मैं
Saarthi Baidyanath
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मेरे
सोने
के
इंतिज़ार
में
ही
मेरा
दुश्मन
हमेशा
जागता
है
Saarthi Baidyanath
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आदमी
अच्छा-बुरा
होता
है
बस
आदमी
छोटा-बड़ा
होता
नहीं
Saarthi Baidyanath
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