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Saarthi Baidyanath
gale milkar mujhe bas chaand se ye dekhna hai
gale milkar mujhe bas chaand se ye dekhna hai | गले मिलकर मुझे बस चाँद से ये देखना है
- Saarthi Baidyanath
गले
मिलकर
मुझे
बस
चाँद
से
ये
देखना
है
ख़ुशी
से
मर
गया
हूँ
या
कि
साँसें
चल
रहीं
हैं
- Saarthi Baidyanath
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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गले
मुझ
को
लगा
लो
ऐ
मेरे
दिलदार
होली
में
बुझे
दिल
की
लगी
भी
तो
ऐ
मेरे
यार
होली
में
गुलाबी
गाल
पर
कुछ
रंग
मुझ
को
भी
जमाने
दो
मनाने
दो
मुझे
भी
जान-ए-मन
त्यौहार
होली
में
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Bhartendu Harishchandra
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बुरे
हालात
है
पर
यार
अब
भी
गले
मिलता
है,
सेहत
पूछता
है
Gagan Bajad 'Aafat'
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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गले
से
वो
लगा
ले
जिसको
भी
अपने
उसे
फिर
इत्र
की
दरकार
ही
क्या
है
Harsh saxena
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बिछड़कर
उसका
दिल
लग
भी
गया
तो
क्या
लगेगा
वो
थक
जाएगा
और
मेरे
गले
से
आ
लगेगा
मैं
मुश्किल
में
तुम्हारे
काम
आऊँ
या
ना
आऊँ
मुझे
आवाज़
दे
लेना
तुम्हें
अच्छा
लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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आज
के
दिन
कभी
सीने
से
लगाते
थे
तुम्हें
और
अब
तुमको
बधाई
भी
नहीं
दे
सकते
Astitwa Ankur
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गले
सब
मिल
रहे
हैं
उस
सेे
हँसकर
हमारा
हक़
तो
मारा
जा
रहा
है
Pooja Bhatia
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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मना
भी
लूँगा
गले
भी
लगाऊँगा
मैं
'अली'
अभी
तो
देख
रहा
हूँ
उसे
ख़फ़ा
कर
के
Ali Zaryoun
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आशिक़ों
की
आँख
का
मोती
ग़ज़ल
देखिए
हँसती,
कभी
रोती
ग़ज़ल
है
नफ़ासत
और
मोहब्बत
से
पली
तर्बियत
के
बीज
भी
बोती
ग़ज़ल
इन
लतीफ़ों-आफ़रीं
के
दरमियान
आलमी
मेयार
को
खोती
ग़ज़ल
मुफ़्लिसी
ये
भूख
और
तश्नालबी
देख
ये
मंज़र
कहाँ
सोती
ग़ज़ल
‘सारथी’
नींदें
न
ज़ाया'
कीजिए
रतजगा
करके
कहाँ
होती
ग़ज़ल
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Saarthi Baidyanath
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जुगनू
सारी
दुनिया
को
समझाता
है
सूरज
उसके
डर
से
दिन
में
आता
है
Saarthi Baidyanath
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इक
नहीं
ये
सौ
दफ़ा
हर
बार
होना
चाहिए
तीर
गर
निकले
जिगर
के
पार
होना
चाहिए
Saarthi Baidyanath
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उसे
जन्नत
कहाँ
से
रास
आए
जिसे
दोज़ख़
की
आदत
लग
चुकी
है
Saarthi Baidyanath
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क़लम
से
हम
सभी
मक़बूल
होते
हैं
कि
हम
सब
सेे
क़लम
मक़बूल
होती
है
Saarthi Baidyanath
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