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Saarthi Baidyanath
dhoop ki tarah ek ladki hai
dhoop ki tarah ek ladki hai | धूप की तरह एक लड़की है
- Saarthi Baidyanath
धूप
की
तरह
एक
लड़की
है
जो
मेरे
हाथ
में
नहीं
आती
- Saarthi Baidyanath
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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मिरी
रौशनी
तिरे
ख़द्द-ओ-ख़ाल
से
मुख़्तलिफ़
तो
नहीं
मगर
तू
क़रीब
आ
तुझे
देख
लूँ
तू
वही
है
या
कोई
और
है
Saleem Kausar
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यह
जानते
हैं
हम
या
ख़ुदा
जानता
है
बस
कैसे
निकल
के
आए
हैं
उस
तीरगी
से
हम
Amaan Pathan
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तेज़
धूप
में
आई
ऐसी
लहर
सर्दी
की
मोम
का
हर
इक
पुतला
बच
गया
पिघलने
से
Qateel Shifai
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रोशनी
बढ़ने
लगी
है
शहर
की
चाँद
छत
पर
आ
गया
है
देखिए
Divy Kamaldhwaj
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हम
अपनी
धूप
में
बैठे
हैं
'मुश्ताक़'
हमारे
साथ
है
साया
हमारा
Ahmad Mushtaq
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मुख़्तसर
होते
हुए
भी
ज़िन्दगी
बढ़
जाएगी
माँ
की
आँखें
चूम
लीजे
रौशनी
बढ़
जाएगी
Munawwar Rana
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राजनीतिक
दलों
के
झंडों
से
तुम
तिरंगे
को
तौलना
भी
मत
Saarthi Baidyanath
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ये
दिल
कमबख़्त
भी
आया
उसी
पर
मैं
जिसको
मुँह
लगाता
भी
नहीं
था
Saarthi Baidyanath
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फूलों
में
नाज़ुकी
कहाँ
है
अब
थी
कभी
ताज़गी
कहाँ
है
अब
आज
कल
इश्क़
तो
दिखावा
है
आशिक़ी
आशिक़ी
कहाँ
है
अब
शक्ल-सूरत
तो
पहले
जैसी
है
आदमी
आदमी
कहाँ
है
अब
अब
नुमाइश
है
सिर्फ़
चेहरों
की
हुस्न
में
सादगी
कहाँ
है
अब
चाँद
अब
दूधिया
नहीं
दिखता
रात
भी
शबनमी
कहाँ
है
अब
लोग
बाहरस
मुस्कुराते
हैं
यार
सच्ची
हँसी
कहाँ
है
अब
छाँव
भी
बदली
बदली
लगती
है
धूप
भी
धूप
सी
कहाँ
है
अब
जो
समुंदर
को
ढूँढने
निकले
ऐसी
अल्हड़
नदी
कहाँ
है
अब
एक
दीवाना
सा
जो
शाइर
था
हाँ
वो
हाँ
'सारथी'
कहाँ
है
अब
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Saarthi Baidyanath
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कौन
है
जो
रहनुमाई
कर
रहा
है
हर
कोई
झूठी
बड़ाई
कर
रहा
है
Saarthi Baidyanath
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जो
मेरे
दिल
में
है
ज़ुबाँ
पर
है
मेरा
ईमान
मेरी
माँ
पर
है
Saarthi Baidyanath
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