kabhi main naazneen ko chaand kahtaa hooñ | कभी मैं नाज़नीं को चाँद कहता हूँ

  - Saarthi Baidyanath
कभीमैंनाज़नींकोचाँदकहताहूँ
कभीज़ोहरा-जबींकोचाँदकहताहूँ
तेराचेहराछुपायाअब्रनेजबसे
मैंहरपर्दा-नशींकोचाँदकहताहूँ
हज़ारोंख़ूब-रूहैंइसज़मानेमें
मगरमैंबसतुम्हींकोचाँदकहताहूँ
कोईबसचाँदकोहीचाँदकहताहै
मैंलम्स-ए-मख़मलींकोचाँदकहताहूँ
इबादतकीतरहजोइश्क़करतेहैं
मैंउनगोशा-नशींकोचाँदकहताहूँ
ज़मानेकोयहीमुझसेेशिकायतहै
किमैंहरजाँ-नशींकोचाँदकहताहूँ
मैंशाइरहूँमेराअंदाज़अपनाहै
मैंअपनीसर-ज़मींकोचाँदकहताहूँ
  - Saarthi Baidyanath
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