maskhara tha baadshah ka ik ghulaam | मसख़रा था बादशह का इक ग़ुलाम

  - S. M. Salim Tanveer
मसख़राथाबादशहकाइकग़ुलाम
होगयाथावोबहुतहीनेक-नाम
ख़िदमत-ए-मख़्लूक़उसकाकामथा
औरइसनेकीकाचर्चाआमथा
देखिएकरनाख़ुदाकाक्याहुआ
एकउसकादोस्तग़ममेंफँसगया
रंगलाईशाहकीचश्म-ए-इताब
बे-नवापरहोगयानाज़िलअज़ाब
मिलचुकाथाहुक्मउसकोक़त्लका
अबरिहाईकाकोईचाराथा
मौतकीसाअ'तनज़रआईक़रीब
मस्ख़रेकेपासपहुँचावोग़रीब
कहसुनायाउसकोअपनामाजरा
शाहवाला-जाहहैमुझसेख़फ़ा
फिरसिफ़ारिशकेलिएवोमसख़रा
जल्द-तरदरबार-ए-शाहीमेंगया
बादशाहनेमस्ख़रेकोदेखकर
कीबड़ेग़ुस्सेसेउसपरभीनज़र
फिरकहातेरीमानूँगाकभी
तल्ख़कररखीहैतूनेज़िंदगी
हरकिसीकातूबनाहैग़म-गुसार
फिरसिफ़ारिशकाहोक्यूँकरए'तिबार
मैंकरूँँगातेरेकहनेकेख़िलाफ़
करनहींसकताक़ुसूरइसकामुआ'फ़
मस्ख़रेनेअर्ज़कीआलम-पनाह
क़ौलसेफिरतेनहींहैंबादशाह
क़त्लहोजाएयेबद-क़िस्मतशिताब
कीजिएदिलखोलकरइसपरइताब
येइताब-ए-शाहजल्दहीदूरहो
औरदिलसरकारकामसरूरहो
बादशहकोगईइसपरहँसी
पाईमुजरिमनेदोबाराज़िंदगी
मस्ख़रेकीअक़्लपरसबशादथे
ग़म-ज़दादिलऐशसेआबादथे
बचगईइकजानउसकीबातसे
होगयाबेकसरिहाआफ़ातसे
  - S. M. Salim Tanveer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy