ज़िंदगी जो लिख रही वो गीत गाने के लिए

  - Rupesh Rahi
ज़िंदगीजोलिखरहीवोगीतगानेकेलिए
अश्कआँखेंपीगईंहैंमुस्कुरानेकेलिए
रूहछलनीहैमगरचेहरेपेहैझूठीहँसी
किसक़दरलाचारहैंहमग़मछुपानेकेलिए
नीचताकीहदजोथींवोतोड़डालीहैंसभी
लोगकितनागिरगएहमकोगिरानेकेलिए
एकदीयाजलरहाइककोठरीकेवास्ते
सबहवाएँचलपड़ींउसकोबुझानेकेलिए
ठोकरेंभीलाज़िमीहैंकुछसफ़रकेवास्ते
कुछतोपत्थरचाहिएहैंलड़खड़ानेकेलिए
खेलतेहैंसबयहाँबसजीतनेकेवास्ते
हौसलारखनामगरतुमहारजानेकेलिए
रोज़गारीसेज़रूरीऔरभीमुद्देहैंकुछ
धर्मअव्वलहैमगरपागलबनानेकेलिए
  - Rupesh Rahi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy