sab kahaanii sunaate hain darbaar kii | सब कहानी सुनाते हैं दरबार की

  - Rupesh Rahi
सबकहानीसुनातेहैंदरबारकी
बातकरतानहींकोईलाचारकी
जी-हुज़ूरीकेदमपरहैचलनेलगा
कैसीहालतहुईहैयेसंसारकी
बादपढ़नेकेशब्दोंकोजानोगेतुम
धारहोतीनहींतेज़तलवारकी
बापकामानजिसनेरक्खाकभी
ख़ाकसमझेगाक़ीमतवोदस्तारकी
हैवहीशख़्सप्याराहमेंजानसे
ज़िंदगीजिसनेजीनीहैदुश्वारकी
उँगलियाँदूसरोंपरउठातारहा
जाँचकीहीनहींअपनेकिरदारकी
  - Rupesh Rahi
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