दिखावे से निकलकर ज़िंदग़ी में लौट जाते हैं

  - Rupesh Rahi
दिखावेसेनिकलकरज़िंदग़ीमेंलौटजातेहैं
चलोअपनीपुरानीबे-दिलीमेंलौटजातेहैं
अगरतुमभीपरेशाँहोचुकेहोशोर-ए-दुनियासे
चलेआओकिअबहमख़ामुशीमेंलौटजातेहैं
अमीरोंकीयेबस्तीहैयहाँइंसाँनहींरहते
मुनासिबहैयहीहमझोपड़ीमेंलौटजातेहैं
यहाँचारोंतरफ़हैरौशनीहीरौशनीबिखरी
सुकूँगरचाहतेहोतीरगीमेंलौटजातेहैं
बहुतनादानियाँकरलीकिदिलतूभीसँभलजाअब
समयकीमाँगहैसंजीदगीमेंलौटजातेहैं
  - Rupesh Rahi
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