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Rudransh Trigunayat
saath diqqat men raha karte hain ham
saath diqqat men raha karte hain ham | साथ दिक़्क़त में रहा करते हैं हम
- Rudransh Trigunayat
साथ
दिक़्क़त
में
रहा
करते
हैं
हम
जान
महफिल
की
हुआ
करते
हैं
हम
वो
हवा
छूती
है
जैसे
शाख़
को
उस
सलीके़
से
छुआ
करते
हैं
हम
क्या
हुआ
वो
गर
जुदा
है,
ख़ुश
रहे
बस
यही
हरदम
दु'आ
करते
हैं
हम
ये
भी
आख़िर
उसने
हक़
खो
ही
दिया
अब
नहीं
ग़ुस्सा
हुआ
करते
हैं
हम
सामने
आए
नहीं
वो
शख़्स
अब
इक
ज़रा
सी
बद्दुआ
करते
हैं
हम
- Rudransh Trigunayat
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भोले
बन
कर
हाल
न
पूछ
बहते
हैं
अश्क
तो
बहने
दो
जिस
से
बढ़े
बेचैनी
दिल
की
ऐसी
तसल्ली
रहने
दो
Arzoo Lakhnavi
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं
एक
किरदार
से
बड़ा
तंग
हूँ
क़लमकार
मुझे
कहानी
में
डाल
ग़ुस्सा
निकालना
है
Umair Najmi
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उसको
नंबर
देके
मेरी
और
उलझन
बढ़
गई
फोन
की
घंटी
बजी
और
दिल
की
धड़कन
बढ़
गई
Ana Qasmi
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बोसा-ए-रुख़्सार
पर
तकरार
रहने
दीजिए
लीजिए
या
दीजिए
इंकार
रहने
दीजिए
Hafeez Jaunpuri
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तुम
को
आता
है
प्यार
पर
ग़ुस्सा
मुझ
को
ग़ुस्से
पे
प्यार
आता
है
Ameer Minai
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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ये
जो
दुनिया
है
इसे
इतनी
इजाज़त
कब
है
हम
पे
अपनी
ही
किसी
बात
का
ग़ुस्सा
उतरा
Abhishek shukla
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बहुत
ही
बात
वाले
थे
अगर
तो
साथ
में
रहते
अगर
तुम
चाहते
तो
हाथ
मेरे
हाथ
में
रहते
Rudransh Trigunayat
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नहीं
जी
लगता
जाने
क्या
हुआ
है
धड़कता
दिल
है
मुँह
उतरा
हुआ
है
बहन
ने
माँ
को
कल
ये
भी
बताया
किसी
चक्कर
में
ये
बहका
हुआ
है
लकीरें
पड़
रहीं
माथे
पे
मेरे
तेरे
बिन
मन
ये
घबराया
हुआ
है
लिया
बोसा
है
मेरे
रुख़
पे
उसने
मेरा
पूरा
बदन
महका
हुआ
है
कोई
ये
बात
बतलाने
की
थी
क्या
कि
तुमको
इश्क़
ये
पहला
हुआ
है
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Rudransh Trigunayat
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मैं
ख़ुश
हूँ
कम
से
कम
वो
साथ
है
मेरे
अमाँ
सब
कुछ
उसे
पाना
नहीं
होता
Rudransh Trigunayat
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मुझे
तुम
पर
कोई
ग़ुस्सा
नहीं
है
तुम्हें
वो
छू
गया
अच्छा
नहीं
है
मैं
माँ
से
था
मिलाने
को
तुम्हें,
पर
तुम्हारा
इश्क़
भी
सच्चा
नहीं
है
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Rudransh Trigunayat
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चूम
लें
होंठ
तुम्हारे
कितना
मुश्किल
है
चाँद
को
पास
बुलाने
जितना
मुश्किल
है
Rudransh Trigunayat
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