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RIZWAN ALI RIZWAN
dard-e-dil hai nihaan zamaane se
dard-e-dil hai nihaan zamaane se | दर्द-ए-दिल है निहाँ ज़माने से
- RIZWAN ALI RIZWAN
दर्द-ए-दिल
है
निहाँ
ज़माने
से
अश्क
छुपते
नहीं
छुपाने
से
अब
नया
और
तुम
ख़ुदा
लाओ
ये
सनम
हो
गए
पुराने
से
वक़्त
पे
छोड़
दो
अभी
देखो
और
रूठेंगे
वो
मनाने
से
लोग
अक्सर
उदास
रहते
हैं
क्या
वफ़ा
उठ
गई
ज़माने
से
देखो
ये
मश्ग़ला
नहीं
अच्छा
बाज़
आ
जाओ
दिल
दुखाने
से
है
अजब
जुस्तजू
का
दरिया
भी
मैं
उभरता
हूँ
डूब
जाने
से
- RIZWAN ALI RIZWAN
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वफ़ा
करेंगे
निबाहेंगे
बात
मानेंगे
तुम्हें
भी
याद
है
कुछ
ये
कलाम
किस
का
था
Dagh Dehlvi
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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कौन
उठाएगा
तुम्हारी
ये
जफ़ा
मेरे
बाद
याद
आएगी
बहुत
मेरी
वफ़ा
मेरे
बाद
Ameer Minai
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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उम्र
शायद
न
करे
आज
वफ़ा
काटना
है
शब-ए-तन्हाई
का
Altaf Hussain Hali
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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चलो
फिर
से
मिलें
हम
अजनबी
बनकर
चलो
फिर
से
वफ़ा
की
क़स
में
हम
खाएँ
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ATUL SINGH
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क्यूँँ
पशेमाँ
हो
अगर
वअ'दा
वफ़ा
हो
न
सका
कहीं
वादे
भी
निभाने
के
लिए
होते
हैं
Ibrat Machlishahri
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वफ़ा
नज़र
नहीं
आती
कहीं
ज़माने
में
वफ़ा
का
ज़िक्र
किताबों
में
देख
लेते
हैं
Hafeez Banarasi
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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अपने
रुख़
पर
नक़ाब
रहने
दे
दिल
में
ये
इज़्तिराब
रहने
दे
मेरी
आँखों
की
पुतलियों
से
परे
इस
हक़ीक़त
को
ख़्वाब
रहने
दे
साक़िया
चश्म-ए-नीलगूँ
से
पिला
जाम-ओ-मीना
शराब
रहने
दे
कोई
काँटा
ही
बख़्श
दे
मुझ
को
चम्पा
बेला
गुलाब
रहने
दे
एक
है
लफ़्ज़-ए-'तू'
मोहब्बत
का
आप
तुम
और
जनाब
रहने
दे
ज़ख़्म
से
ख़ूँ
न
पोंछ
ऐ
ज़ालिम
ज़ख़्म
की
आब-ओ-ताब
रहने
दे
कुछ
त'अल्लुक़
हो
हश्र
पर
बाक़ी
दरमियाँ
कुछ
हिसाब
रहने
दे
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RIZWAN ALI RIZWAN
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वक़्त
पे
छोड़
दो
अभी
देखो
और
रूठेंगे
वो
मनाने
से
RIZWAN ALI RIZWAN
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दास्ताँ
ख़त्म
हुई
गिर
गए
पर्दे
लेकिन
मैं
वो
किरदार
नहीं
जिसको
भुला
दे
दुनिया
RIZWAN ALI RIZWAN
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अभी
कुछ
दाएरे
खींचे
हैं
मैं
ने
अभी
तामीर
ख़ुद
की
कर
रहा
हूँ
RIZWAN ALI RIZWAN
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गर
समाअत
हो
तुझे
ऐ
हम-सफ़ीर
इक
समुन्दर
गुफ़्तगू
का
दिल
में
है
RIZWAN ALI RIZWAN
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