KHaak udti hai raat-bhar mujh men | ख़ाक उड़ती है रात-भर मुझ में

  - Rehman Faris
ख़ाकउड़तीहैरात-भरमुझमें
कौनफिरताहैदर-ब-दरमुझमें
मुझकोख़ुदमेंजगहनहींमिलती
तूहैमौजूदइसक़दरमुझमें
मौसम-ए-गिर्याएकगुज़ारिशहै
ग़मकेपकनेतलकठहरमुझमें
बे-घरीअबमिरामुक़द्दरहै
इश्क़नेकरलियाहैघरमुझमें
आपकाध्यानख़ूनकेमानिंद
दौड़ताहैइधर-उधरमुझमें
हौसलाहोतोबातबनजाए
हौसलाहीनहींमगरमुझमें
  - Rehman Faris
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