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Raushan miyaa'n
chale muskuraa kar ha
chale muskuraa kar ha | चले मुस्कुरा कर हमें वो मना कर
- Raushan miyaa'n
चले
मुस्कुरा
कर
हमें
वो
मना
कर
मना
कर
हमें
वो
चले
मुस्कुरा
कर
हुआ
फिर
सितमगर
मिरा
फ़ेसबुक
लव
मिरा
फ़ेसबुक
लव
हुआ
फिर
सितमगर
मिरा
खाया
गोबर
मुझे
धौंस
दे
दी
मुझे
धौंस
दे
दी
मिरा
खाया
गोबर
भिगोया
है
बिस्तर
कटी
रात
जूँ
तूँ
कटी
रात
जूँ
तूँ
भिगोया
है
बिस्तर
- Raushan miyaa'n
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इसी
खंडर
में
कहीं
कुछ
दिए
हैं
टूटे
हुए
इन्हीं
से
काम
चलाओ
बड़ी
उदास
है
रात
Firaq Gorakhpuri
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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फेंक
कर
रात
को
दीवार
पे
मारे
होते
मेरे
हाथों
में
अगर
चाँद
सितारे
होते
Unknown
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आधी
रात
की
चुप
में
किस
की
चाप
उभरती
है
छत
पे
कौन
आता
है
सीढ़ियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
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रात
बाक़ी
थी
जब
वो
बिछड़े
थे
कट
गई
उम्र
रात
बाक़ी
है
Khumar Barabankvi
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यूँँ
पकड़
बात
को
बैठ
रोता
है
क्या
कर
भला
हो
बुरा
और
होता
है
क्या
आप
ने
अपने
कूचे
में
क्यूँँ
बो
दिए
बीज
कूचे
में
कोई
ये
बोता
है
क्या
सुब्ह
होने
को
है
अब
ज़रा
शर्म
कर
यूँँ
दबा
कान
को
यार
सोता
है
क्या
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Raushan miyaa'n
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फंकी
ज़हर
की
मार
गए
हम
कब
जीते
थे
जो
हार
गए
हम
Raushan miyaa'n
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ऐसे
होने
पे
लाखों
लानत
है
कैफ़ी
ख़ाली
घर
में
सारे
बर्तन
मेरे
होते
Raushan miyaa'n
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तेज़
रफ़्तार
के
जहाँ
में
मैं
ऐसे
चलता
हूँ
जैसे
नाव
चले
Raushan miyaa'n
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बन
रहा
है
मकीं
ख़ैर
अंजान
है
बे-ख़बर
है
किराए
का
मेहमान
है
ज़ात
पूछी
तो
माँझी
ने
सीधे
कहा
बैठ
जाएँ
अगर
आप
इंसान
है
क्यूँँ
समझ
ज़िन्दगी
जी
रहा
था
तुझे
सोच
कर
ये
मिरा
दिल
परेशान
है
क्या
करूँँ
सुन
फ़क़ीरन
ने
हँस
कर
कहा
कर
दु'आ
और
सज्दा
ये
रमज़ान
है
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Raushan miyaa'n
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