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Raj Tiwari
jism par aap ke laal joda rahe aur mehndi rachi ho mere naam ki
jism par aap ke laal joda rahe aur mehndi rachi ho mere naam ki | जिस्म पर आप के लाल जोड़ा रहे और मेंहदी रची हो मेरे नाम की
- Raj Tiwari
जिस्म
पर
आप
के
लाल
जोड़ा
रहे
और
मेंहदी
रची
हो
मेरे
नाम
की
दोनों
ने
मिल
के
की
थी
कभी
आरज़ू
ऐसी
ही
ख़ूब-सूरत
सी
इक
शाम
की
- Raj Tiwari
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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कमी
कमी
सी
थी
कुछ
रंग-ओ-बू-ए-गुलशन
में
लब-ए-बहार
से
निकली
हुई
दु'आ
तुम
हो
Ali Sardar Jafri
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हम
जानते
तो
इश्क़
न
करते
किसू
के
साथ
ले
जाते
दिल
को
ख़ाक
में
इस
आरज़ू
के
साथ
Meer Taqi Meer
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अश्कों
को
आरज़ू-ए-रिहाई
है
रोइए
आँखों
की
अब
इसी
में
भलाई
है
रोइए
Abbas Qamar
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है
दु'आ
जल्दी
जन्नत
अता
हो
तुझे
तू
मेरे
इश्क़
का
इश्क़
है
ऐ
रक़ीब
Prit
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माँ
की
करते
हुए
ख़िदमत
मुझे
आ
जाए
क़ज़ा
ऐ
ख़ुदा
एक
ये
बेटे
की
दु'आ
है
तुझ
सेे
''Akbar Rizvi"
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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तमाम
हैं
बिमारियाँ
मगर
तुम्हें
हुआ
है
इश्क़
तो
अब
तुम्हें
ज़रूरत-ए-दुआ
ही
है
दवा
नहीं
Hasan Raqim
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उस
से
मिले
ज़माना
हुआ
लेकिन
आज
भी
दिल
से
दु'आ
निकलती
है
ख़ुश
हो
जहाँ
भी
हो
Mohammad Alvi
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ये
बर्ग-ए-गुल
हैं
मौसम-ए-बहार
के
जो
दिल
पे
छाले
पड़
गए
हैं
प्यार
के
Raj Tiwari
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उन
आँखों
में
ही
उम्मीदों
के
बादल
मुस्कुराते
हैं
सुलगती
धूप
से
पैरों
में
जिन
के
छाले
आते
हैं
Raj Tiwari
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तिरी
उम्मीद
में
कुछ
यूँँ
हर
इक
लम्हा
गुज़रता
है
किसी
दरिया
को
जैसे
देखकर
प्यासा
गुज़रता
है
Raj Tiwari
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मुस्कुराता
हुआ
इक
चेहरा
हमें
याद
आया
शीशा
देखा
तो
कोई
अपना
हमें
याद
आया
Raj Tiwari
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यहाँ
हर
एक
शख़्स
में
बसर
है
हब्स-ए-क़ायनात
जिसे
भी
देखो
वो
यहाँ
ख़ला
का
इक
दयार
है
कभी
मिलेंगे
मोड़
पर
यहीं
जहाँ
खड़ा
हूँ
मैं
ये
इब्तिदा
का
दौर
है
अभी
तुझे
ख़ुमार
है
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Raj Tiwari
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