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Raj Tiwari
is nazar ne chaand dekha hai zameen par
is nazar ne chaand dekha hai zameen par | इस नज़र ने चाँद देखा है ज़मीं पर
- Raj Tiwari
इस
नज़र
ने
चाँद
देखा
है
ज़मीं
पर
कैसे
कोई
फूल
अब
अच्छा
लगेगा
- Raj Tiwari
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वो
जिस
ने
आँख
अता
की
है
देखने
के
लिए
उसी
को
छोड़
के
सब
कुछ
दिखाई
देता
है
Zubair Ali Tabish
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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कमाल
ये
है
मुझे
देखती
हैं
वो
आँखें
मलाल
ये
है
उन्हें
देखना
नहीं
आता
Dilawar Ali Aazar
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सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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देर
तक
आँख
मुसीबत
में
पड़ी
रहती
है
तुम
चले
जाते
हो,
तस्वीर
बनी
रहती
है
Fauziya Rabab
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मैंने
बस
इतना
पूछा
था
क्या
देखते
हो
भला
मैंने
ये
कब
कहा
था
मुझे
देखना
छोड़
दो
गीली
मिट्टी
की
ख़ुशबू
मुझे
सोने
देती
नहीं
मेरे
बालों
में
तुम
उँगलियाँ
फेरना
छोड़
दो
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Tajdeed Qaiser
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किस
जहाँ
में
तू
बैठकर
देखता
है
मुझ
को
ख़ुदा
क्यूँँ
ज़मीं
पर
आकर
सभी
ज़ख़्म
मेरे
भरता
नहीं
Raj Tiwari
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मुरव्वतन
नदी
की
इब्तिदा
थी
कोहसार
से
जो
आदतन
समंदरो
में
जा
मिली
है
प्यार
से
Raj Tiwari
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तुम्हें
देखे
बहुत
दिन
हो
गए
हैं
हम
अब
दिन
गिन
रहे
हैं
उँगलियों
पर
Raj Tiwari
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बहुत
आगे
निकल
आया
हूँ
मैं
अब
इस
सफ़र
में
यहाँ
से
लौटने
की
कोई
गुंजाइश
नहीं
है
ये
कैसा
खेल
है
इन
बादलों
का
शहर
में
दोस्त
कहीं
सूखा
नहीं
है
तो
कहीं
बारिश
नहीं
है
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Raj Tiwari
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वही
हम-सफ़र
है
सफ़र
के
लिए
बने
दोस्त
जो
उम्र
भर
के
लिए
Raj Tiwari
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