raah-e-ishq ek haseen mujh ko safar lagta hai | राह-ए-इश्क़ एक हसीं मुझ को सफ़र लगता है

  - Raj Tiwari
राह-ए-इश्क़एकहसींमुझकोसफ़रलगताहै
परमुझेमंजिलोंसेइश्क़केडरलगताहै
शाख़-ए-दिलपरयूँँगुलाबोंकाशजरलगताहै
हम-सफ़रतुमसाहोतोसीधाडगरलगताहै
शामथकहारकेजबकामसेघरजाताहूँ
माँकोआवाज़दूँतोघरमेराघरलगताहै
यूँँज़मींपरदिलोंकीग़ज़लेंनहींफूटतीहैं
लफ़्ज़ोंकोसींचनेमेंख़ून-ए-जिगरलगताहै
टूटीकश्तीमेंउतरताहुआदरियामानो
जैसेसदियोंकाकोईप्यासाबशरलगताहै
किसीकीराहकेपत्थरहटादोहोसकेतो
फिरसफ़रज़िन्दगीकाएकसफ़रलगताहै
आजभीधड़कनेंउससेमेरीवाबस्ताहैं
दर्दउठताहैउधरऔरइधरलगताहै
  - Raj Tiwari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy