sochta hooñ ki naseeba yuñ nikhaara jaa.e | सोचता हूँ कि नसीबा यूँँ निखारा जाए

  - Rajesh fard unnavi
सोचताहूँकिनसीबायूँँनिखाराजाए
ग़मकेदिनहोभीतोहँसहँसकेगुज़ाराजाए
हमकोधोखेहीमुसीबतमेंमिलेयारोंसे
क्यूँँदुश्मनकोहीइसबारपुकाराजाए
मुफ़लिसीमेंभीख़ुदासब्रमुझेदेइतना
जानजाएभलेईमाँहमाराजाए
मौजसाहिलसावोअबरब्तनिभातामुझसेे
यूँँलगेछूटताहरबारकिनाराजाए
ज़िन्दगीचैनसुकूँख़्वाबजाँदिलऔरख़ुशी
तूबताऔरभलातुझपेक्यावाराजाए
तेरीदुनियातेरेबंदेतोजुदाक़िस्मतक्यूँँ
मेरेहक़मेंभीकोईतोड़ासिताराजाए
  - Rajesh fard unnavi
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