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Atul K Rai
nayi peedhi ko aakhir kaun kal rastaa dikhaayega
nayi peedhi ko aakhir kaun kal rastaa dikhaayega | नई पीढ़ी को आख़िर कौन कल रस्ता दिखाएगा
- Atul K Rai
नई
पीढ़ी
को
आख़िर
कौन
कल
रस्ता
दिखाएगा
बग़ीचे
में
पुराने
पेड़
का
होना
ज़रूरी
है
- Atul K Rai
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बीच
रस्ते
मुकर
गए
होते
साथ
जो
रहगुज़र
गए
होते
आपको
ख़ूब
जानते
हैं
हम
आप
होते
तो
मर
गए
होते
वक़्त
हमको
डरा
नहीं
पाता
वक़्त
रहते
जो
डर
गए
होते
एक
परिवार
ख़ुश
हुआ
होता
साँझ
ढलते
जो
घर
गए
होते
शब
मुहब्बत
जता
रही
होती
आप
जो
चूम
कर
गए
होते
चाँद
छत
पर
जो
आ
गया
होता
रौशनी
में
उतर
गए
होते
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Atul K Rai
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लटकन
झटकन
ओढ़
मटकते
एक
परी
का
दिख
जाना,
प्लेन
गुजरने
पर
बचपन
के
ख़ुश
होने
सा
लगता
है!
बिन्दी,
लिपस्टिक,
चूड़ी,
कंगन
और
किनारा
साड़ी
का,
लाल
कलर
पर
कब्ज़ा
अय
हय
कितना
अच्छा
लगता
है!
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Atul K Rai
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जीत
कर
लंका
हुए
वापस
अयोध्या
राम
और
एक
अरसे
से
बुझे
दीपक
सभी
जलने
लगे
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दिहाड़ी
भी
नहीं
देता
समय
से
बहुत
कंजूस
है
मालिक
हमारा
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धरा
को
तृप्त
करता
है
गरजता
ही
नहीं
बादल
चले
आओ
बरसकर
आत्मा
को
तृप्त
कर
दो
तुम
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