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Atul K Rai
ek dhoke ne jahannum kar diya
ek dhoke ne jahannum kar diya | एक धोके ने जहन्नुम कर दिया
- Atul K Rai
एक
धोके
ने
जहन्नुम
कर
दिया
थी
कभी
जन्नत
हमारी
ज़िंदगी
- Atul K Rai
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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अगर
जन्नत
मिला
करती
फ़क़त
सज्दों
के
बदले
में
तो
फिर
इबलीस
मुर्शिद
सब
सेे
पहले
जन्नती
होता
Shajar Abbas
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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ये
मेरा
ज़ख़्म
जितना
सब्ज़
है
उसके
मुक़ाबिल
कहीं
ज़्यादा
नमक
नुक़सान
उसका
हो
रहा
है
Atul K Rai
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क़ैद
में
भी
चैन
से
रहने
नहीं
देता
है
वो
डर
लगा
रहता
है
जाने
कब
रिहा
कर
दे
हमें
Atul K Rai
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बहारें
हों
या
वीरानी
से
सब
जंगल
गुज़रते
हैं
रुदन
हो
हास्य
हो
सबको
बराबर
बाँटता
है
वो
Atul K Rai
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चाँद
नहीं
शामिल
होता
उनकी
ज़िद
में
वक़्त
गिरा
देता
है
जिनके
छत
साहब
Atul K Rai
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जीत
हो
या
हो
हार
क्या
करना
फ़ालतू
का
प्रचार
क्या
करना
जब
प्रतिष्ठा
की
बात
आ
जाए
जंग
फिर
दरकिनार
क्या
करना
आख़िरी
तक
प्रयास
जारी
रख
बोल
मत
इंतिज़ार
क्या
करना
सोचना
ठीक
है
तुम्हारा
भी
सोचना
है
तो
प्यार
क्या
करना
प्रेम
अव्वल
है
मान
लेते
हैं
कौन
अव्वल
पे
रार
क्या
करना
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Atul K Rai
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