vasl ki rut ho ki furqat ki fazaa mujh se hai | वस्ल की रुत हो कि फ़ुर्क़त की फ़ज़ा मुझ से है

  - Rahul Jha
वस्लकीरुतहोकिफ़ुर्क़तकीफ़ज़ामुझसेहै
इश्क़कीराहमेंसबअच्छाबुरामुझसेहै
येहक़ीक़तहैकितुझसेहैमिराहोनामगर
बंदगीमेरीहैसोतूभीख़ुदामुझसेहै
तूतोबसछोड़गयाथामेरेसीनेमेंइसे
तेरीफ़ुर्क़तकामगरज़ख़्महरामुझसेहै
मेरेहीहोनेसेतारीहैदिवानोंपेजुनूँ
तेरेनज़दीकभीयेरक़्स-ए-हवामुझसेहै
वर्नाएकतजरबा-ए-दीदहीकाफ़ीहोता
मेरीहीआँखमगरखौफ़ज़दामुझसेहै
मैंनेबख़्शाहैतुझेयेगुल-ए-ताज़ाकाशबाब
येनईख़ुशबुएँयेरंगनयामुझसेहै
मुझसेहासिलथातेरेजिस्मकेधागेकोकपास
किसतरहसोचताहैतूकिजुदामुझसेहै
  - Rahul Jha
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