क्या ज़माना आ गया है 'ऐब भी फ़न हो गए

  - Rahib Maitrey
क्याज़मानागयाहै'ऐबभीफ़नहोगए
हमजिन्हेंपत्थरसमझतेथेवोदर्पनहोगए
घरकेकोनेमेंपड़ेरहतेहैंख़ामोशीकेसाथ
आज-कलमाँ-बापभीमिट्टीकेबर्तनहोगए
यूँँतरक़्क़ीकीतरफ़हमनेबढ़ाएहैंक़दम
तंग-दामनथेहीअबतोचाक-दामनहोगए
हुकूमतइसतरफ़क्यातूनेसोचाहैकभी
जोतिरेमद्दाहथेक्यूँतेरेदुश्मनहोगए
रातदिनतेरेलिएजलनाहमाराकामहै
सियासतहमतिरेचूल्हेकाईंधनहोगए
आदमीइनकोपहनताहैलिबासोंकीतरह
झूट'अय्यारीफ़रेब-ओ-मक्रफ़ैशनहोगए
मीडियावालोंनेऐसाखेलखेलाधर्मका
जिनमेंकलतकदोस्तीथीआजदुश्मनहोगए
  - Rahib Maitrey
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