log har mod pe ruk ruk ke sambhalte kyun hain | लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं

  - Rahat Indori
लोगहरमोड़पेरुकरुककेसँभलतेक्यूँँहैं
इतनाडरतेहैंतोफिरघरसेनिकलतेक्यूँँहैं
मय-कदाज़र्फ़केमेआ'रकापैमानाहै
ख़ालीशीशोंकीतरहलोगउछलतेक्यूँँहैं
मोड़होताहैजवानीकासँभलनेकेलिए
औरसबलोगयहींकेफिसलतेक्यूँँहैं
नींदसेमेरात'अल्लुक़हीनहींबरसोंसे
ख़्वाबकेमिरीछतपेटहलतेक्यूँँहैं
मैंजुगनूहूँदियाहूँकोईताराहूँ
रौशनीवालेमिरेनामसेजलतेक्यूँँहैं
  - Rahat Indori
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