मैं रोज़ दाग़ से दामन सजाती रहती हूँ

  - Ragini Preet
मैंरोज़दाग़सेदामनसजातीरहतीहूँ
अँधेरेराहपेदीपकजलातीरहतीहूँ
जोख़ारनफ़रतोंकावादियोंमेंबोतेहैं
मैंउसज़मींपेमुहब्बतउगातीरहतीहूँ
तेरीजफ़ानेहीफ़ौलादसाबनायाहै
शिकस्ताक़ल्बलिएमुस्कुरातीरहतीहूँ
वरक़कीकश्तियाँलहरोंसेख़ूबटकरातीं
मैंउनकेहौसलेपेसरझुकातीरहतीहूँ
तेरासुरूरमेरेदिलपेअबभीक़ाएमहै
तेरेख़यालमेंग़ज़लेंबनातीरहतीहूँ
  - Ragini Preet
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