ab ye aalam hai ki jis shay pe nazar jaati hai | अब ये आलम है कि जिस शय पे नज़र जाती है

  - Raees Niyazi
अबयेआलमहैकिजिसशयपेनज़रजातीहै
हू-ब-हूआपकीतस्वीरनज़रआतीहै
ख़ुदकोतारीख़किसीवक़्तजोदोहरातीहै
मेरेहालातपेदुनियाकोहँसाजातीहै
याद-ए-अय्याम-ए-बहाराँभीनहींवज्ह-ए-सुकूँ
अबतोतज़ईन-ए-क़फ़सहीमुझेबहलातीहै
बर्क़बनबनकेगिरीहैमिरेदिलपरअक्सर
वोतजल्लीजोसर-ए-तूरनज़रआतीहै
आजकुछउनकीतवज्जोहमेंकमीपाताहूँ
ज़िंदगीमौतसेदो-चारहुईजातीहै
दिलभरआताहैमिरादेखकेनमआँखकोई
अपनेरोनेपेतोअबमुझकोहँसीआतीहै
मैंवोइकनंग-ए-ज़मानाहूँअज़लहीसे'रईस'
ज़िंदगीहैकिमिरेनामसेशरमातीहै
  - Raees Niyazi
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