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Rachit Sonkar
bhag kar hi ho sakti hai shaa
bhag kar hi ho sakti hai shaa | भाग कर ही हो सकती है शादी रचित
- Rachit Sonkar
भाग
कर
ही
हो
सकती
है
शादी
रचित
पागलों
वाली
बातें
न
कर
समझा
कर
- Rachit Sonkar
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रुक
गया
है
वो
या
चल
रहा
है
हमको
सब
कुछ
पता
चल
रहा
है
उसने
शादी
भी
की
है
किसी
से
और
गाँव
में
क्या
चल
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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हम
चाह
कर
भी
टूटते
हैं
हर
दफ़ा
होता
यही
है
इश्क़
का
क्या
क़ायदा
हर
वक़्त
तुम
यूँँ
याद
आते
हो
मुझे
जैसे
नई
दुल्हन
करे
मिस
मायका
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Harsh saxena
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इसलिए
ये
महीना
ही
शामिल
नहीं
उम्र
की
जंत्री
में
हमारी
उसने
इक
दिन
कहा
था
कि
शादी
है
इस
फरवरी
में
हमारी
Tehzeeb Hafi
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दूल्हा-दूल्हन
को
नहीं
तकता
कोई
क्यूँँ
कि
उस
बारात
में
इक
चाँद
है
Shadab Javed
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वो
दुल्हन
बन
के
रुख़्सत
हो
गई
है
कहाँ
तक
कार
का
पीछा
करोगे?
Zubair Ali Tabish
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भुला
के
दूल्हा
जिसे
बैठता
है
मंडप
में
वो
चेहरा
आख़िरी
फेरे
में
याद
आता
है
Shanawar Kiratpuri
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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तुम
भी
शादी
करके
हमको
भूल
गई
हम
भी
नाम
कमाने
में
मसरूफ़
हुए
Tanoj Dadhich
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उनको
दूर
किया
जाता
है
जो
बरसों
के
साथी
हैं
और
अनजाने
लोगों
की
आपस
में
शादी
होती
है
Darpan
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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सच
हुआ
है
कहाँ
कुछ
भी
सोचा
हुआ
हम
यही
सोच
कर
सोचते
कुछ
नहीं
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी
फ़क़त
हँसते-हँसते
तो
नहीं
कटती
कितना
भी
छुपाओ
तुम
अश्क
आ
ही
जाते
हैं
Rachit Sonkar
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मेरे
हाथों
में
है
पायल
उसकी
है
मेरे
पास
ख़ज़ाना
देखो
Rachit Sonkar
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तेरी
यादों
को
भुलाएँ
कैसे
मलबा
यादों
का
जलाएँ
कैसे
कितना
भारी
है
बताएँ
कैसे
इश्क़
का
बोझ
उठाएँ
कैसे
जागते-जागते
कट
जाती
है
रातों
में
ख़ुद
को
सुलाएँ
कैसे
हाथ
लग
ही
गई
मेरी
माँ
के
तेरी
तस्वीर
छुपाएँ
कैसे
इक
उदासी
हैं
हमारे
भीतर
हँसने
वालो
को
दिखाएँ
कैसे
तेरी
तस्वीर
हटा
दी
माँ
ने
कमरा
अब
अपना
सजाएँ
कैसे
जान
बसती
है
अभी
भी
इस
में
तेरी
तस्वीर
जलाएँ
कैसे
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Rachit Sonkar
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हमें
इक
रेल
गाड़ी
रोकनी
हैं
सो
हम
तेरा
दुपट्टा
ले
रहे
हैं
Rachit Sonkar
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