is dar ki si raahat bhi do aalam men kahii hai | इस दर की सी राहत भी दो आलम में कहीं है

  - Raaz Yazdani
इसदरकीसीराहतभीदोआलममेंकहींहै
जीनाभीयहींहैमुझेमरनाभीयहींहै
अबवाक़िफ़-ए-मफ़्हूम-ए-वफ़ाक़ल्ब-ए-हज़ींहै
अबआपकीबेदादभीबेदादनहींहै
तुमऔरमिरीख़ाना-ख़राबीपेतबस्सुम
उम्मीदसेबढ़करअभीक़द्र-ए-दिल-ओ-दींहै
यातेरेसिवाहुस्नहीदुनियामेंनहींथा
यादेखरहाहूँकिजोमंज़रहैहसींहै
येज़ीस्तहैयामौतसमझमेंनहींआता
अबदर्दहैऔरदर्दकीतकलीफ़नहींहै
  - Raaz Yazdani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy