sozish-e-gham ka bayaañ lab pe na laaun kyunkar | सोज़िश-ए-ग़म का बयाँ लब पे न लाऊँ क्यूँँकर

  - Raabia Sultana Nashad
सोज़िश-ए-ग़मकाबयाँलबपेलाऊँक्यूँँकर
दर्दहैहदसेसिवादिलमेंछुपाऊँक्यूँँकर
तूयहींदोस्तमिरेग़मकामुदावाकरदे
चोटजोदिलपेलगीहैवोदिखाऊँक्यूँँकर
कैसेदोहराऊँग़म-ए-ज़ीस्तकेअफ़्सानेको
सुननेवालाकोईहोतोसुनाऊँक्यूँँकर
रौशनीहोतीनहींमेरेसियह-ख़ानेमें
शम-ए-दिलअबशब-ए-हिज्राँमेंजलाऊँक्यूँँकर
सिल्क-ए-अंजुमहैंतिरीयादमेंआँसूअबतक
तेरेदामनकोसितारोंसेसजाऊँक्यूँँकर
जबकेतिनकेकासहाराभीनहींहै'नाशाद'
अपनीकश्तीकोतलातुमसेबचाऊँक्यूँँकर
  - Raabia Sultana Nashad
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