ye mo'jiza bhi mohabbat kabhi dikh | ये मो'जिज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे

  - Qateel Shifai
येमो'जिज़ाभीमोहब्बतकभीदिखाएमुझे
किसंगतुझपेगिरेऔरज़ख़्मआएमुझे
मैंअपनेपाँवतलेरौंदताहूँसाएको
बदनमिराहीसहीदोपहरभाएमुझे
ब-रंग-ए-ऊदमिलेगीउसेमिरीख़ुश्बू
वोजबभीचाहेबड़ेशौक़सेजलाएमुझे
मैंघरसेतेरीतमन्नापहनकेजबनिकलूँ
बरहनाशहरमेंकोईनज़रआएमुझे
वहीतोसबसेज़ियादाहैनुक्ता-चींमेरा
जोमुस्कुराकेहमेशागलेलगाएमुझे
मैंअपनेदिलसेनिकालूँख़यालकिसकिसका
जोतूनहींतोकोईऔरयादआएमुझे
ज़मानादर्दकेसहरातकआजलेआया
गुज़ारकरतिरीज़ुल्फ़ोंकेसाएसाएमुझे
वोमेरादोस्तहैसारेजहाँकोहैमा'लूम
दग़ाकरेवोकिसीसेतोशर्मआएमुझे
वोमेहरबाँहैतोइक़रारक्यूँँनहींकरता
वोबद-गुमाँहैतोसौबारआज़माएमुझे
मैंअपनीज़ातमेंनीलामहोरहाहूँ'क़तील'
ग़म-ए-हयातसेकहदोख़रीदलाएमुझे
  - Qateel Shifai
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