ilzaam kuchh na kuchh to mire sar bhi aayega | इल्ज़ाम कुछ न कुछ तो मिरे सर भी आएगा

  - Qaisar Siddiqi
इल्ज़ामकुछकुछतोमिरेसरभीआएगा
आँगनमेंपेड़होगातोपत्थरभीआएगा
सूरजकेग़ुस्लकरनेकामंज़रभीआएगा
इनजंगलोंकेबा'दसमुंदरभीआएगा
सामाँजराहतोंकेभीहमसाथलेचलें
इसरास्तेमेंशहर-ए-सितमगरभीआएगा
वोसाँपजिसकोदूधपिलातीहैदुश्मनी
थैलीसेएकरोज़वोबाहरभीआएगा
पलकोंपेअपनीख़्वाब-ए-तजल्लीसजाइए
शामआईहैतोरातकालश्करभीआएगा
जोसायाखेलताहैअभीमेरीगोदमें
इकदिनवोमेरेक़दकेबराबरभीआएगा
इसदोपहरकीधूपकोशायदख़बरनहीं
सहरामेंकोईमोमकापैकरभीआएगा
जबतुमनहींतोउसकाभीक्याकामहैयहाँ
तुमआओगेतोबज़्ममें'क़ैसर'भीआएगा
  - Qaisar Siddiqi
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