शम-ए-महफ़िलहोकेभीगिर्वीदा-ए-महफ़िलनहीं
मैंहूँदुनियामेंमगरदुनियामेंमेरादिलनहीं
मेरेदिलकीधड़कनेंजबतकहैंतूफ़ाँसैंकड़ों
मौजबेताबीहैमेरीज़िंदगीसाहिलनहीं
येनमाज़ोंमेंख़याल-ए-जन्नत-ओ-हूर-ओ-क़सूर
ज़ाहिद-ए-कज-बींअभीनौ-मश्क़हैकामिलनहीं
बे-नियाज़-ए-फ़िक्र-ए-मंज़िलबे-ख़ुदीनेकरदिया
अबमिरेदामनपेदाग़-ए-हसरत-ए-मंज़िलनहीं
ना-ख़ुदाक्यूँँआसमाँकोतकरहाहैबारबार
रुख़उधरकश्तीकाअबकरदेजिधरसाहिलनहीं
इकदिल-ए-दीवानाथाजातारहाजानेभीदो
येकहोक्यूँँआज-कलसीरौनक़-ए-महफ़िलनहीं
मेरीफ़ितरतहीनहीं'क़ैसर'किमैंछुपकरपि
यूँँ
जिसमेंखटकाहोवोजन्नतभीमिरेक़ाबिलनहीं