zindagi bhi guzar khwahishon men gaii | ज़िन्दगी भी गुज़र ख़्वाहिशों में गई

  - Harpreet Kaur
ज़िन्दगीभीगुज़रख़्वाहिशोंमेंगई
ख़ुदकोक्यूँँढूँढ़नेक़ाफ़िलोंमेंगई
अबकिसीसेगिलाऔरशिकवारहा
जबसेरबसेमिलीरहमतोंमेंगई
यूँँघटाएँहैछाईंयेसावनकीफिर
चाँदनीछुपकेअबबादलोंमेंगई
फोनकायेनशासिरचढ़ाहैयूँँकुछ
ज़ीस्ततोबसइन्हींफ़ासलोंमेंगई
यूँँनिभानेलगी'प्रीत'अबक़ाफ़िए
इकग़ज़लऔरलोशाइरोंमेंगई
  - Harpreet Kaur
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