ग़म में डूबों को हँसाने के लिए काफ़ी हूँ

  - Harpreet Kaur
ग़ममेंडूबोंकोहँसानेकेलिएकाफ़ीहूँ
फूलसहरामेंखिलानेकेलिएकाफ़ीहूँ
रासआएहैयूँँतन्हाईकेसाएगहरे
रातकोदिनसाबनानेकेलिएकाफ़ीहूँ
ख़ुदकोजोआइनेसामानकेबैठेहैंइधर
कैफ़ियतउनकीदिखानेकेलिएकाफ़ीहूँ
शादहोकरयहाँजीनाहैज़रूरीसबको
शा'इरीसेयेबतानेकेलिएकाफ़ीहूँ
शम्अबनकेजोजले'प्रीत'भरीमहफ़िलमें
आगहरदिलमेंलगानेकेलिएकाफ़ीहूँ
  - Harpreet Kaur
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy