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Praveen Bhardwaj
chalo bichhad jaate hain agar yahii teri chaahat hai
chalo bichhad jaate hain agar yahii teri chaahat hai | चलो बिछड़ जाते हैं अगर यही तेरी चाहत है
- Praveen Bhardwaj
चलो
बिछड़
जाते
हैं
अगर
यही
तेरी
चाहत
है
मैं
सही
तू
ग़लत
नहीं
अपनी-अपनी
किस्मत
है
जा
रहे
हो
तो
जाओ
भी
अबकी
तोहफ़ा
मत
देना
आख़िरी
दफ़ा
एक
सच
बोलो
मत
कहो
मुहब्बत
है
दिल
में
क्या
तककलुफ्
उसकी
कैसी
मज़बूरी
है
थोड़े
वक़्त
की
दूरी
क्या
ये
इश्क़
नहीं
ज़रूरत
है
- Praveen Bhardwaj
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तुम
अपने
बारे
में
कुछ
देर
सोचना
छोड़ो
तो
मैं
बताऊँ
कि
तुम
किस
क़दर
अकेले
हो
Waseem Barelvi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
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हिज्र
में
तुमने
केवल
बाल
बिगाड़े
हैं
हमने
जाने
कितने
साल
बिगाड़े
हैं
Anand Raj Singh
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एक
रोज़
सभी
को
मर
जाना
है
जानाँ
उस
सेे
पहले
मुझे
घर
जाना
है
जानाँ
तुझे
करनी
है
मुहब्बत
तो
आज
कर
वक़्त
हाथो
से
बिखर
जाना
है
जानाँ
मेरे
खौफ़
की
शाम
ख़त्म
होने
को
है
इसके
बाद
तुझे
डर
जाना
हैं
जानाँ
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Praveen Bhardwaj
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कहाँ
इक
तीर
भी
सीने
पे
लग
पाया
मैं
घाइल
भी
हूँ
जैसे
है
उसी
का
ग़म
Praveen Bhardwaj
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किसे
रोकें
चले
जाएँगे
हम
भी
जिसे
जाना
था
वो
मर
के
गया
है
Praveen Bhardwaj
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ये
तो
ख़ुद
की
ग़लती
थी
शिकायत
किसको
करना
है
लो
तुम
ज़िन्दगी
रख
लो
मुझे
तो
रोज़
मारना
है
जाने
कैसी
घड़ी
थी
वो
मिले
तुम
जिस
में
आकर
के
तब
जो
ले
गए
थे
तुम
अब
उसे
ता-उम्र
भरना
है
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Praveen Bhardwaj
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कभी
तो
हम
दरख़्तों
से
भी
पूछो
क्या
हमें
ग़म
है
नहीं
है
डाल
पर
इक
फल
नहीं
हैं
घोंसला
कोई
Praveen Bhardwaj
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