makhmoori men kal ham ko koi roop hamaara yaad aaya | मख़मूरी में कल हम को कोई रूप हमारा याद आया

  - Prakash Pandey
मख़मूरीमेंकलहमकोकोईरूपहमारायादआया
सूरतकीदमकभीयादआईनज़रोंकाशरारायादआया
जबउनसेेकोईरब्तथाइकफ़रहाचाँदकोतकतेथे
उल्फ़तमेंजिनकोभूलगएवोचाँदहमारायादआया
जबग़मनेहमकोयादकियातबहमनेउनकोयादकिया
जबहमनेउनकोयादकियातोअश्कहमारायादआया
आँखोंसेकैसेनींदहमारीशबभरपल-पललड़तीथी
वोआजजानेक्यूँँकरफिरसेहश्रदुबारायादआया
सोचेंफिरआजभुलादेंहमहरबुतकीपुरानीयादमगर
किसबुतसेकैसेआँखमिलीहरशोख़नज़ारायादआया
  - Prakash Pandey
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