har kham nikal raha hai | हर ख़म निकल रहा है

  - Pradeep Rajput 'Mahir'
हरख़मनिकलरहाहै
मौसमबदलरहाहै
मुफ़लिसबदनकाढाँचा
क़िस्तोंमेंगलरहाहै
इकइन्क़िलाबमेरे
ख़ूँमेंउबलरहाहै
उम्मीदकादियाइक
आँखोंमेंजलरहाहै
अच्छेदिनोंकासपना
गर्दिशमेंपलरहाहै
माज़ीकाकोईसाया
अश्कोंमेंढलरहाहै
क्यामिलगयाहैजोतू
इतनाउछलरहाहै
उनसेेहमारामिलना
दुनियाकोखलरहाहै
गरवोसाथ'माहिर'
फिरकौनचलरहाहै
  - Pradeep Rajput 'Mahir'
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy