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Piyush Paiham
dariyaa ko vo gale lagaane niklaa tha
dariyaa ko vo gale lagaane niklaa tha | दरिया को वो गले लगाने निकला था
- Piyush Paiham
दरिया
को
वो
गले
लगाने
निकला
था
लेकिन
लहरों
से
वो
साहिल
टूट
गया
मुझको
पहली
बार
मुहब्बत
करनी
थी
पहली
बार
में
ही
मेरा
दिल
टूट
गया
- Piyush Paiham
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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बड़े
बूढों
के
घर
को
अब
जो
बच्चे
छोड़
देते
हैं
समुंदर
साहिलों
तक
आ
के
रस्ता
मोड़
देते
हैं
वसीयत
में
कोई
भी
दस्तख़त
जाली
नहीं
होता
ये
पूरे
होश
में
अपने
ही
घर
को
तोड़
देते
हैं
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anupam shah
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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हैरत
से
जो
यूँँ
मेरी
तरफ़
देख
रहे
हो
लगता
है
कभी
तुम
ने
समुंदर
नहीं
देखा
Aanis Moin
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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सभी
को
ग़म
है
समुंदर
के
ख़ुश्क
होने
का
कि
खेल
ख़त्म
हुआ
कश्तियाँ
डुबोने
का
Shahryar
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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मेरे
आगे
क़लम
रखी
थी
और
बंदूक़ें
रक्खी
थीं
मैंने
इक
दरवाज़ा
खोला
इक
दरवाज़ा
छोड़
दिया
Piyush Paiham
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जब
भी
तुझ
पर
ग़ुस्सा
आया
या
फिर
मुझको
प्यार
आया
मैंने
इक
ख़त
लिक्खा
तुझको
और
लिखकर
के
फाड़
दिया
Piyush Paiham
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हमने
दुनिया
को
सुनाई
थीं
हमारी
ख्वाहिशें
और
फिर
दुनिया
हमारी
जान
लेने
आ
गई
Piyush Paiham
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कर
दिया
है
वार
तेरी
चाल
पर
आ
गए
'आशिक़
सभी
हड़ताल
पर
तू
बुरा
माने
न
तो
कुछ
पूछ
लूँ
बाल
किसका
है
ये
तेरी
शाल
पर
रूह
की
परछाइयों
को
क्या
पता
क्या
लिखा
है
आदमी
की
खाल
पर
आज
मुझको
आ
गई
कैसे
हँसी
फूल
कैसे
खिल
गया
इस
डाल
पर
अब
गुज़ारा
हो
तो
हो
कैसे
बता
बात
भी
करना
मना
है
काल
पर
पूछो
मत
तुम
क्या
हुआ
कैसे
हुआ
छोड़
दो
तुम
मुझको
मेरे
हाल
पर
वक़्त
आ
पहुँचा
है
अब
तुम
खींच
दो
आन
बैठा
है
परिंदा
जाल
पर
रोक
ले
जाने
से
हमको
और
फिर
होंठ
रख
दे
तू
हमारे
गाल
पर
एक
चिठ्ठी
ने
हमें
तड़पा
दिया
चैन
से
बैठे
थे
हम
चौपाल
पर
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Piyush Paiham
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हमको
बस
अपना
ही
कहते
रह
गए
आप
भी
बातों
में
हल्के
रह
गए
एक
अफ़सर
उसको
लेकर
चल
दिया
दौड़
में
हम
सब
सेे
पीछे
रह
गए
दस्तकें
आती
रहीं
दरवाज़े
पर
और
हम
रस्सी
से
लटके
रह
गए
मैं
कमी
रिश्तों
में
गिनता
रह
गया
हाथ
में
पैसे
ही
पैसे
रह
गए
ठंड
में
इक
लाश
बच्चे
की
मिली
ठंड
में
सपने
सिकुड़ते
रह
गए
देश
में
आज़ादियों
का
दिन
मना
और
सड़कों
पर
तिरंगे
रह
गए
दोनों
बच्चे
बस
चुके
हैं
शहर
में
गाँव
में
माँ
बाप
बूढ़े
रह
गए
एक
सीधा
रास्ता
था
मौत
का
ज़िंदगी
में
क्यूँ
भटकते
रह
गए
वो
यहाँ
पर
आई
आकर
जा
चुकी
सारे
लड़के
उसको
तकते
रह
गए
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Piyush Paiham
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