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Piyush Nishchal
teri chaahat men barbaa
teri chaahat men barbaa | तेरी चाहत में बर्बादी का कारण बस इतना-सा है
- Piyush Nishchal
तेरी
चाहत
में
बर्बादी
का
कारण
बस
इतना-सा
है
मुझको
ये
तेरे
गजरा
औ'
काजल
ने
बर्बाद
किया
है
- Piyush Nishchal
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वैसे
तो
तुम्हीं
ने
मुझे
बर्बाद
किया
है
इल्ज़ाम
किसी
और
के
सर
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मुझे
पता
है
कि
बर्बाद
हो
चुका
हूँ
मैं
तू
मेरा
सोग
मना
मुझ
को
सोगवार
न
कर
Anjum Saleemi
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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ग़मनाक
मैं,
बे-साज़
मैं,
बर्बाद
मैं
ऐ
दोस्त
तू
ख़ुश
है
अगर
तब
ठीक
है
Moin Ahmed "Aazad"
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मच्छरदानी
ऑलआउट
पे
पैसे
क्यूँ
बर्बाद
करूँँ
ख़ून
तो
उसने
चूस
लिया
है
मच्छर
से
अब
डरना
क्यूँँ
SHIV SAFAR
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न
सहम
कर
न
डर
के
छोड़ता
है
हंस
तालाब
मर
के
छोड़ता
है
वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त,
बर्बाद
कर
के
छोड़ता
है
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Harman Dinesh
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वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
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न
पूछो
मुझ
से
लज़्ज़त
ख़ानमाँ-बर्बाद
रहने
की
नशेमन
सैकड़ों
मैं
ने
बना
कर
फूँक
डाले
हैं
Allama Iqbal
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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ख़ुदास
भी
नहीं
रिश्ता
हमारा
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
अ'अज़
हो
जाते
हम
सबके
लिए
पर
किसी
से
जी
नहीं
मिलता
हमारा
किताबें
बोझ
बनती
जा
रही
है
बिखरता
जा
रहा
सपना
हमारा
अभी
मिलने
को
दो
दिन
ही
हुए
थे
कि
ग़ुस्सा
खा
गया
रिश्ता
हमारा
लिपट
कर
रोता
हूँ
दरवाज़े
से
तो
सिसक
कर
रोता
है
परदा
हमारा
तुम्हारी
साड़ियों
से
ही
भरेगा
पड़ा
है
ख़ाली
जो
बक्सा
हमारा
कभी
तो
हम
भी
तुम
सेे
ये
कहेंगे
बहुत
प्यारा
हुआ
बेटा
हमारा
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Piyush Nishchal
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हम
हिज्र
में
भी
ख़ुश
हैं
पर
दीवार-ओ-दर
में
रहते
हैं
हम
शहरयार-ए-ग़म
ख़ुदा
की
हर
नज़र
में
रहते
हैं
हम
लोग
अब
इक-दूसरे
से
मुख़्तलिफ़
होकर
हैं
ख़ुश
वो
अपने
घर
में
रहती
है
हम
अपने
घर
में
रहते
हैं
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Piyush Nishchal
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यक़ीं
मानो
कि
वो
अब
भी
मुहब्बत
करती
है
मुझ
सेे
यक़ीं
ये
भी
करो
यारा
कि
मैं
अब
झूठ
कहता
हूँ
Piyush Nishchal
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साथ
रख
कर
ये
मुहब्बत
अपनी
अपनी
जी
रहे
हैं
लोग
सब
बर्बादी
अपनी
इक
ज़रा
सा
रास्ता
क्या
माँगा
उस
सेे
उसने
तो
सारी
इमारत
ढा
दी
अपनी
आदमी
वो
तो
ज़ियादा
मतलबी
है
जो
दिखाता
फिरता
है
अच्छाई
अपनी
पास
मेरे
तुम
तो
आने
से
रहे
सो
आज
कल
में
मौत
ही
है
आनी
अपनी
इश्क़
में
आबाद
होना
था
मुझे
पर
हिज्र
में
ही
ख़ाक
है
बरनाई
अपनी
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Piyush Nishchal
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वो
जब
आती
है
तो
धोखे
की
बू
आती
है
उसको
शायद
कोई
जी
भर
के
चूमा
होगा
Piyush Nishchal
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