o raat ke musaafir | ओ रात के मुसाफ़िर

  - Piyush Mishra
रातकेमुसाफ़िर
तूभागनासंभलके
पोटलीमेंतेरीहो
आगनासंभलके
चलतोतूपड़ाहै
फ़ासलाबड़ाहै
जानलेअंधेरेके
सरपेख़ूंचढ़ाहै
मुक़ामखोजलेतू
इनसानकेशहरमें
इनसानखोजलेतू
देखतेरीठोकरसे
राहकावोपत्थर
माथेपेतेरेकसके
लगजाएनाउछलके
रातकेमुसाफ़िर
मानाकिजोहुआहै
वोतूनेहीकियाहै
इन्होंनेभीकियाहै
उन्होंनेभीकियाहै
मानाकितूनेहां-हां
चाहानहींथालेकिन
तूजानतानहींकिये
कैसेहोगयाहै
लेकिनतूफिरभीसुनले
नहींसुनेगाकोई
तुझेयेसारीदुनिया
खाजाएगीनिगलके
रातकेमुसाफ़िर
तूभागनासंभलके
पोटलीमेंतेरीहो
आगनासंभलके
  - Piyush Mishra
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