hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Piyush Mishra
chaandni chauk ki factory aur mazdoor
chaandni chauk ki factory aur mazdoor | "चाँदनी चौक की फ़ैक्टरी और मज़दूर"
- Piyush Mishra
"चाँदनी
चौक
की
फ़ैक्टरी
और
मज़दूर"
गिटर-पिटर
यूँँ
धूँ-धक्कड़
ये
गुत्थम-गुत्थी
चटर-पटर
ये
दंगल
लाशें
ज़ोर-जबर
ये
हड्डी
घिस
के
चरर-परर...
पट्ठे
उठ
जा
तू
ताल
ठोक
ये
पसली
में
जा
घुसी
नोक
ये
खाँसी
तगड़ी
ज़ोरदार
ये
एसिड
संग
में
कोलतार...
अजब
दास्ताँ
है
लेकिन
ये
घिसती
रातें
पिसते
दिन
दिन
का
पहिया
रात
का
चक्का
रेशा-रेशा
हक्क-बक्का...!
ये
पीठ
है
लकड़ी
सख़त-सख़त
ये
सौ
मन
बोरी
पटक-पटक
ये
काली-काली
क्रीम
जमा
ये
पॉलिश
कर
के
खाए
दमा...
अरे
उठ
साले
कि
दिन
चढ़ता
फिर
आई
दुपहरी
देख
भरी
ये
खौं-खौं
खाँसी
रेत
भरी...
अजब
दास्ताँ
है
लकिन
ये
घिसती
रातें
पिसते
दिन
दिन
का
पहिया
रात
का
चक्का
रेशा-रेशा
हक्का-बक्का...!
ये
निकला
बलग़म
थूकों
में
इक
रोटी
है
सौ
भूखों
में
उस
पे
हैं
क़र्ज़े
लाख
चढ़े
ये
सूद-ब्याज
बिंदास
बढ़े
भट्ठी
की
चाँदनी
चम-चम-चम
इक
हुआ
फेफड़ा
कम-कम-कम
स्टील
कटर
से
कटे
हाथ
तेज़ाब
गटर
नायाब
साथ
अजब
दास्ताँ
है
लेकिन
ये
घिसती
रातें
पिसते
दिन
दिन
का
पहिया
रात
का
चक्का
रेशा-रेशा
हक्का-बक्का...!
ना
ग्लास
मास्क
ना
चश्मा
भई
लाशों
के
ढेर
पे
सपना
भई
सीलन
घुटती
अब
सड़न-सड़न
बदबू
साँसें
अरे
व्हाट
ए
फ़न...
फिर
दिन
टूटा
फिर
शाम
बढ़ी
फिर
सूनी
सुनसाँ
रात
चढ़ी
ये
बदन
टूट
पुर्ज़ा-पुर्ज़ा
ये
थकन
कहे
मर
जा
मर
जा...
अजब
दास्ताँ
है
लेकिन
ये
घिसती
रातें
पिसते
दिन
दिन
का
पहिया
रात
का
चक्का
रेशा-रेशा
हक्का-बक्का...!
साले
कुत्ते
हर्रामी
तू
बदज़ात
चोर
है
नामी
तू
तेज़ाब
जलन
पस
फफ्फोले
इक
रात
बिताने
घर
हो
ले...
भट्ठी
की
आग
में
मांस
जला
ये
खाल
खिंची
और
साँस
जला
ये
पेट
कटी
आँतें
बोलें
आधी
पूरी
बातें
बोलें...
अजब
दास्ताँ
है
लेकिन
ये
घिसती
रातें
पिसते
दिन
दिन
का
पहिया
रात
का
चक्का
रेशा-रेशा
हक्का-बक्का...
- Piyush Mishra
भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
72 Likes
मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
39 Likes
जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
Send
Download Image
26 Likes
मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
Read Full
Khalid Sajjad
Send
Download Image
22 Likes
धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
43 Likes
दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
Read Full
Akhtar Shumar
Send
Download Image
43 Likes
फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
Send
Download Image
29 Likes
रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
Send
Download Image
7 Likes
बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
Send
Download Image
42 Likes
साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
Read Full
Ashu Mishra
Send
Download Image
37 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Love Shayari
Charagh Shayari
Kamar Shayari
Khyaal Shayari
haseen Shayari