jo mere gunaahon pe nazar rakhte hain | जो मेरे गुनाहों पे नज़र रखते हैं

  - Parvez Muzaffar
जोमेरेगुनाहोंपेनज़ररखतेहैं
एल्बममेंवहीतितलीकेपररखतेहैं
ज़ुल्मतकीसमाअ'तमेंखुलपड़ताहै
मज़लूमकेअल्फ़ाज़असररखतेहैं
किसवक़्तकहाँकौनजलाताहैचराग़
इतनीतोपतंगेभीख़बररखतेहैं
हैंआबलेकाँटोंकेलिएपैरवीमें
तारोंकेलिएदीदा-ए-तररखतेहैं
बातेंवोभलाकैसेकरेंगेखुलकर
'परवेज़'मियाँदिलमेंजोडररखतेहैं
  - Parvez Muzaffar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy