मैंकरूँँआजइश्क़-ए-दिलबरकीबातें
यानीकेमौसम-ए-दीदा-ए-तरकीबातें
मतयक़ींकरसियासतकेवायदोंपर
जानतेहैंमहलकबखंडरकीबातें
रोज़ढकलेतीथीनीलाजिस्मअपना
शुक्रहैआगईबाहरघरकीबातें
ख़्वाबअपनेबताऊँतोकहताहैवो
सहरामेंरहतेहोऔरसागरकीबातें
मानसम्मानपत्नीकादावपरहै
आजअच्छीनहींरणमेंडरकीबातें
हैअधूराज़मानासाराकभी'नूर'
तोकभीकाफीहैबसपलभरकीबातें