khaamoshi ki dhun pe tanhaa raqs karti raat hai | ख़ामोशी की धुन पे तन्हा रक़्स करती रात है

  - Parnav Mishra Tejas
ख़ामोशीकीधुनपेतन्हारक़्सकरतीरातहै
ज़ख़्मखाएदिलकेसीनेमेंउतरतीरातहै
सहरासहराप्यासकेमंज़रसेहोकररू-ब-रू
अबकिसी'आशिक़केहोंटोंसेउभरतीरातहै
फूलसूरजरौशनीसेदूरशबनमकीतरफ़
दिनढलेतारोंकेदर्पनमेंसँवरतीरातहै
टीसगहरीऔरयादोंकाउतरताक़ाफ़िला
प्यारकेदोज़ख़सेसहमीऔरकतरतीरातहै
कुछसियहतस्वीरमाज़ीकेख़यालोंकाधुआँ
सबमेंअपनेदर्दकाकुछअक्सभरतीरातहै
यूँँकहूँतोएकलड़काउसकोप्याराहैबहुत
लोग'तेजस'येभीकहतेउसपेमरतीरातहै
  - Parnav Mishra Tejas
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