gulshan se aa.e hain na biyaabaan se aa.e hain | गुलशन से आए हैं न बयाबाँ से आए हैं

  - Parkash Nath Parvez
गुलशनसेआएहैंबयाबाँसेआएहैं
दीवानेतेरेसरहद-ए-इम्काँसेआएहैं
इकमाह-वशकेहुस्न-ए-फ़रोज़ाँकेफ़ैज़से
दिलमेंतजल्लियातकेतूफ़ाँसेआएहैं
आँखोंमेंहैबहार-ए-दो-आलमबसीहुई
हमलोगआजमहफ़िल-ए-जानाँसेआएहैं
क्यातेरेबसमेंउनकामुदावाभीहैकोई
दिलमेंजोज़ख़्मलुत्फ़-ए-फ़रावाँसेआएहैं
अल्लहरेएहतिमाम-ए-बहाराँकेसिलसिले
सहरामेंफूलसेहन-ए-गुलिस्ताँसेआएहैं
उनकेकरमकीमुफ़्तमेंतौहीनहोगई
इल्ज़ामहमपेतंगी-ए-दामाँसेआएहैं
दिलकोग़म-ए-जहाँकीशिकायतनहींरही
आदाब-ए-ज़ीस्तसोहबत-ए-रिंदाँसेआएहैं
क्यायादगईवोनिगाह-ए-जमील-तर
फिरदिलमेंइज़्तिराबकेपैकाँसेआएहैं
'परवेज़'आसमाँकोबदनामकीजिए
जितनेसितमहैंकू-ए-निगाराँसेआएहैं
  - Parkash Nath Parvez
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