kyun teergii si chhaai charaaghon ke darmiyaañ | क्यूँँ तीरगी सी छाई चराग़ों के दरमियाँ

  - Pallavi Mishra
क्यूँँतीरगीसीछाईचराग़ोंकेदरमियाँ
क्याहुस्नछुपगयाहैनक़ाबोंकेदरमियाँ
नासूरबनगयाकईसालोंकेदरमियाँ
इकज़ख़्मजानेकैसाहैछालोंकेदरमियाँ
वोनींदमेंभीआँखसेओझलहोजनाब
उसकोबसालियाहैनिगाहोंकेदरमियाँ
शिद्दतहैप्यासमेंतोसरोवरकेजाक़रीब
कबतिश्नगीमिटीहैसराबोंकेदरमियाँ
औलादपेअगरजोमुसीबतहोतीआज
क्यूँँमाँकाहाथरुकतानिवालोंकेदरमियाँ
यूँँहीजनाबहमकोयेओहदानहींनसीब
सालोंहैसरखपायाकिताबोंकेदरमियाँ
जोग़ौरसेपढ़ोगेसवालोंकोबारबार
मिलजाएगाजवाबसवालोंकेदरमियाँ
साहिलकोतोड़नेकीहिमाक़तकिएबग़ैर
लहरेंउछलरहीहैंकिनारोंकेदरमियाँ
मिलतानहींहैकुछभीतरद्दुदकिएबग़ैर
काँटेभरेपड़ेहैंगुलाबोंकेदरमियाँ
शायदमिरेसनमनेकियायादमुझकोआज
हिचकीतभीहैआईनिवालोंकेदरमियाँ
  - Pallavi Mishra
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy