jahaan choo ke dekhooñ wahin par khala hai | जहाँ छू के देखूँ वहीं पर ख़ला है

  - Om Prabhakar
जहाँछूकेदेखूँवहींपरख़लाहै
हवामेंहवाकेसिवाऔरक्याहै
तिरेबा'दयेहालहैशह्र-ए-दिलका
बारिशतूफ़ाँबाद-ए-सबाहै
लिखाहैजोनज़रोंनेलौह-ए-नज़रपर
वोदिलकेसिवाऔरकिसनेपढ़ाहै
धंसकनेलगाहैवोकमराकिजिसमें
परिंदोंकाछोड़ाहुआघोंसलाहै
खुलाहैकहींइकदरीचाअभीभी
किजिसमेंकोईख़ूब-सूरतखड़ाहै
मिरादर्दमेराहैउसकाउसीका
तोक्यूँग़म-गुसारीकायेसिलसिलाहै
  - Om Prabhakar
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